Wednesday, 1 April 2020
इस संसार की रचना कैसे हुई | संसार की सार्ष्टि का वर्णन |
April 01, 2020
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2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। 3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया॥ 6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया॥ 9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। 12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया॥ 14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। 15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया। 16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। 17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, 18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया॥ 20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें। 21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 22 और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 23 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया। 24 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। 25 सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 26 फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। 27 तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की। 28 और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो। 29 फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं: 30 और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। 31 तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया॥
उत्पत्ति - अध्याय 2
1. यो आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया।
2 और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया। और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। 3 और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया; क्योंकि उस में उसने अपनी सृष्टि की रचना के सारे काम से विश्राम लिया। 4 आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया: 5 तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था; 6 तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी 7 और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया। 8 और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया। 9 और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया। 10 और उस वाटिका को सींचने के लिये एक महानदी अदन से निकली और वहां से आगे बहकर चार धारा में हो गई। 11 पहिली धारा का नाम पीशोन है, यह वही है जो हवीला नाम के सारे देश को जहां सोना मिलता है घेरे हुए है। 12 उस देश का सोना चोखा होता है, वहां मोती और सुलैमानी पत्थर भी मिलते हैं। 13 और दूसरी नदी का नाम गीहोन है, यह वही है जो कूश के सारे देश को घेरे हुए है। 14 और तीसरी नदी का नाम हिद्देकेल है, यह वही है जो अश्शूर के पूर्व की ओर बहती है। और चौथी नदी का नाम फरात है। 15 तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को ले कर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे, 16 तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: 17 पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा॥ 18 फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उससे मेल खाए। 19 और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के बनैले पशुओं, और आकाश के सब भाँति के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखें, कि वह उनका क्या क्या नाम रखता है; और जिस जिस जीवित प्राणी का जो जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया। 20 सो आदम ने सब जाति के घरेलू पशुओं, और आकाश के पक्षियों, और सब जाति के बनैले पशुओं के नाम रखे; परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उससे मेल खा सके। 21 तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकाल कर उसकी सन्ती मांस भर दिया। 22 और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। 23 और आदम ने कहा अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है: सो इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है। 24 इस कारण पुरूष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक तन बने रहेंगे। 25 और आदम और उसकी पत्नी दोनो नंगे थे, पर लजाते न थे॥
जब शैतान का सामना हुआ प्रभु येशु मसीह से | Jesus Vs Devil |
April 01, 2020
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मत्ती - अध्याय 4
1. तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उस की परीक्षा हो।
2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्त में उसे भूख लगी। 3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। 4 उस ने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। 5 तब इब्लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। 6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे। 7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। 8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका विभव दिखाकर 9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। 10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर। 11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे॥ 12 जब उस ने यह सुना कि यूहन्ना पकड़वा दिया गया, तो वह गलील को चला गया। 13 और नासरत को छोड़कर कफरनहूम में जो झील के किनारे जबूलून और नपताली के देश में है जाकर रहने लगा। 14 ताकि जो यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो। 15 कि जबूलून और नपताली के देश, झील के मार्ग से यरदन के पार अन्यजातियों का गलील। 16 जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योति चमकी॥ 17 उस समय से यीशु प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, कि मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है। 18 उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 20 वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। 21 और वहां से आगे बढ़कर, उस ने और दो भाइयों अर्थात जब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए॥ 23 और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बल्ता को दूर करता रहा। 24 और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्टात्माएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्हें चंगा किया। 25 और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली॥
1. तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उस की परीक्षा हो।
2 वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्त में उसे भूख लगी। 3 तब परखने वाले ने पास आकर उस से कहा, यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं। 4 उस ने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। 5 तब इब्लीस उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। 6 और उस से कहा यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा; और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे। 7 यीशु ने उस से कहा; यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। 8 फिर शैतान उसे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर ले गया और सारे जगत के राज्य और उसका विभव दिखाकर 9 उस से कहा, कि यदि तू गिरकर मुझे प्रणाम करे, तो मैं यह सब कुछ तुझे दे दूंगा। 10 तब यीशु ने उस से कहा; हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर। 11 तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे॥ 12 जब उस ने यह सुना कि यूहन्ना पकड़वा दिया गया, तो वह गलील को चला गया। 13 और नासरत को छोड़कर कफरनहूम में जो झील के किनारे जबूलून और नपताली के देश में है जाकर रहने लगा। 14 ताकि जो यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो। 15 कि जबूलून और नपताली के देश, झील के मार्ग से यरदन के पार अन्यजातियों का गलील। 16 जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योति चमकी॥ 17 उस समय से यीशु प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, कि मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है। 18 उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 20 वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। 21 और वहां से आगे बढ़कर, उस ने और दो भाइयों अर्थात जब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए॥ 23 और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बल्ता को दूर करता रहा। 24 और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्टात्माएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्हें चंगा किया। 25 और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली॥
प्रभु यीशु को मसीह क्यों कहा जाता है? मसीह का अर्थ क्या है?
April 01, 2020
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सभी भाइयों और बहनों को पता है कि "मसीह" शब्द पुराने नियम में कहीं नहीं है, लेकिन केवल नए नियम में दिखाई देता है, और यह कि मसीह प्रभु यीशु का अभिवादन है। हिब्रू में यह शब्द "मसीहा" है, और इसका अर्थ है "अभिषिक्त व्यक्ति।"
पुराने नियम में रिकॉर्ड किया गया है कि पुजारी भगवान का अभिषेक करते हैं। उदाहरण के लिए, हारून और उसके बेटों ने अभिषेक करने के बाद याजक के रूप में सेवा की। (निर्गमन 28:41 देखें)। इसके अलावा, जब परमेश्वर ने इसराएलियों के लिए एक राजा को चुना, तो उसने अभिषिक्त तेल के साथ चुने हुए व्यक्ति का अभिषेक करने के लिए एक पैगंबर भेजा।
उदाहरण के लिए, पैगंबर सैमुअल ने किश के बेटे, शाऊल का अभिषेक किया, जो यहोवा परमेश्वर के वचन के अनुसार इज़राइल राष्ट्र का पहला राजा था (देखें 1 शमूएल 9: 15-17 और 10: 1)। शाऊल द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने के बाद, क्योंकि उसने परमेश्वर की अवज्ञा की, यहोवा परमेश्वर के वचन से, शमूएल ने यिशै के पुत्र डेविड का अभिषेक किया, जो इस्राएल के लोगों का राजा था (देखें 1 शमूएल 16: 1-13)। उसके मरने से पहले, राजा डेविड ने पुजारी जादोक और भविष्यवक्ता नाथन को गिहोन के पास भेज दिया ताकि वह अपने बेटे सुलैमान को राजा के रूप में अभिषिक्त कर सके (देखें 1 राजा 1: 32–40)। इन घटनाओं से, हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि "अभिषिक्त व्यक्ति" वह था जिसने भगवान की सेवा की या राजा के रूप में चुना। यदि मसीह को अभिषिक्त जन के रूप में संदर्भित किया जाता है, तो ऐसा क्यों है कि महायाजक हारून और उसके पुत्रों को अभिषेक करने के बाद मसीह नहीं कहा जाता था? और शाऊल, दाऊद और सुलैमान भी अभिषिक्त हुए और सभी राजा थे, इसलिए उन्हें मसीह क्यों नहीं कहा गया? ऐसा क्यों है कि केवल प्रभु यीशु को ही मसीह कहा गया?
यह समस्या मुझे कई सालों से परेशान कर रही थी। मैंने इसके बारे में कई प्रचारकों से पूछा था, लेकिन कभी भी सटीक उत्तर नहीं मिला। कुछ समय पहले तक, जब मैंने एक दोस्त से इसका जिक्र किया और उसने मेरे साथ शब्दों के दो अंश पढ़े और फॉलो किए, तो मुझे सच्चाई का यह पहलू समझ में आया। ये दो मार्ग कहते हैं, “अवतार भगवान को मसीह कहा जाता है, और मसीह परमेश्वर की आत्मा द्वारा दान किया गया मांस है। यह मांस किसी भी आदमी के विपरीत है जो मांस का है। यह अंतर इसलिए है क्योंकि मसीह मांस और रक्त का नहीं, बल्कि आत्मा का अवतार है। उसके पास एक सामान्य मानवता और पूर्ण दिव्यता है। उसकी दिव्यता किसी पुरुष के पास नहीं है। उसकी सामान्य मानवता उसके सभी सामान्य क्रियाकलापों को मांस में समाहित कर लेती है, जबकि उसकी दिव्यता ईश्वर के कार्य को वहन करती है। यह उसकी मानवता या दिव्यता हो, दोनों स्वर्गीय पिता की इच्छा को प्रस्तुत करते हैं। मसीह का पदार्थ आत्मा है, अर्थात् देवत्व है। इसलिए, उसका पदार्थ स्वयं ईश्वर का है ... "
“परमेश्वर मांस बन जाता है जिसे मसीह कहा जाता है, और इसलिए मसीह जो लोगों को सच्चाई दे सकता है उसे परमेश्वर कहा जाता है। इसके बारे में अत्यधिक कुछ नहीं है, क्योंकि उसके पास ईश्वर का पदार्थ है, और ईश्वर का स्वभाव, और उसके कार्य में ज्ञान है, जो मनुष्य द्वारा अप्राप्य है। ... क्राइस्ट केवल पृथ्वी पर भगवान की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि इसके बजाय, ईश्वर द्वारा ग्रहण किए गए विशेष मांस के रूप में वह बाहर काम करता है और मनुष्य के बीच अपने काम को पूरा करता है। यह मांस वह नहीं है जिसे केवल किसी भी आदमी द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है, बल्कि वह जो पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य को पर्याप्त रूप से सहन कर सकता है, और भगवान के स्वभाव को व्यक्त कर सकता है, और अच्छी तरह से भगवान का प्रतिनिधित्व करता है, और मनुष्य को जीवन प्रदान कर सकता है। "
यह पता चला है कि "मसीह" का अर्थ है भगवान का अवतार। हालाँकि वह अपनी उपस्थिति के मामले में सामान्य और सामान्य है, मसीह के पास ईश्वर का दिव्य होना है और वह ईश्वर की आत्मा का अवतार है। वे स्वयं भगवान हैं। कि प्रभु यीशु को मसीह कहा जा सकता है क्योंकि वह ईश्वर अवतार है। उनके पास न केवल सामान्य मानवता है, बल्कि उनमें देवत्व भी है - जो किसी भी व्यक्ति के पास नहीं है। प्रभु यीशु का शब्द और काम और उनके द्वारा बताए गए स्वभाव ईश्वर की दिव्यता की पूर्ण अभिव्यक्ति थे। उदाहरण के लिए, प्रभु यीशु का शब्द और कार्य प्राधिकरण और शक्ति से भरा है। जैसे ही उन्होंने बात की, उनके शब्द वास्तविकता बन गए, जैसे कि जब उन्होंने मृत को वापस जीवन में लाया, हवा और समुद्र को शांत किया, बीमारी को ठीक किया, आदमी के पापों को माफ कर दिया, और इसी तरह।
प्रभु यीशु ने युग की शुरुआत की, पश्चाताप का रास्ता लाया, स्वर्ग के राज्य के रहस्यों को प्रकट किया, और कई सच्चाइयों और एक स्वभाव को व्यक्त किया जो मुख्य रूप से दया और प्रेम था। सभी मानव जाति को भुनाने के लिए, उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया और परिणामस्वरूप, मनुष्य के पापों को क्षमा कर दिया गया। प्रभु यीशु का दिव्य पदार्थ किसी भी निर्मित होने के कारण नहीं है। हालाँकि हारून और उसके वंशज, शाऊल, दाऊद और सुलैमान अभिषिक्त जन थे, वे केवल परमेश्वर के प्राणी थे और वे लोग जो पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए गए थे या जिन्होंने परमेश्वर की सेवा की थी। उनके पास देवत्व का थोड़ा भी निशान नहीं था और वे ईश्वर के अवतार नहीं थे। इसलिए, उन्हें मसीह नहीं कहा जा सकता था। हालाँकि मसीह की बाहरी उपस्थिति एक साधारण व्यक्ति के समान थी, लेकिन उनका सार किसी भी व्यक्ति से अलग है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर को अवतार के अलावा किसी को मसीह नहीं कहा जा सकता है। प्रभु के मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद, मेरे दोस्त की संगति सुनने के बाद, मेरी उलझन आखिरकार हल हो गई।
पुराने नियम में रिकॉर्ड किया गया है कि पुजारी भगवान का अभिषेक करते हैं। उदाहरण के लिए, हारून और उसके बेटों ने अभिषेक करने के बाद याजक के रूप में सेवा की। (निर्गमन 28:41 देखें)। इसके अलावा, जब परमेश्वर ने इसराएलियों के लिए एक राजा को चुना, तो उसने अभिषिक्त तेल के साथ चुने हुए व्यक्ति का अभिषेक करने के लिए एक पैगंबर भेजा।
उदाहरण के लिए, पैगंबर सैमुअल ने किश के बेटे, शाऊल का अभिषेक किया, जो यहोवा परमेश्वर के वचन के अनुसार इज़राइल राष्ट्र का पहला राजा था (देखें 1 शमूएल 9: 15-17 और 10: 1)। शाऊल द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने के बाद, क्योंकि उसने परमेश्वर की अवज्ञा की, यहोवा परमेश्वर के वचन से, शमूएल ने यिशै के पुत्र डेविड का अभिषेक किया, जो इस्राएल के लोगों का राजा था (देखें 1 शमूएल 16: 1-13)। उसके मरने से पहले, राजा डेविड ने पुजारी जादोक और भविष्यवक्ता नाथन को गिहोन के पास भेज दिया ताकि वह अपने बेटे सुलैमान को राजा के रूप में अभिषिक्त कर सके (देखें 1 राजा 1: 32–40)। इन घटनाओं से, हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि "अभिषिक्त व्यक्ति" वह था जिसने भगवान की सेवा की या राजा के रूप में चुना। यदि मसीह को अभिषिक्त जन के रूप में संदर्भित किया जाता है, तो ऐसा क्यों है कि महायाजक हारून और उसके पुत्रों को अभिषेक करने के बाद मसीह नहीं कहा जाता था? और शाऊल, दाऊद और सुलैमान भी अभिषिक्त हुए और सभी राजा थे, इसलिए उन्हें मसीह क्यों नहीं कहा गया? ऐसा क्यों है कि केवल प्रभु यीशु को ही मसीह कहा गया?
यह समस्या मुझे कई सालों से परेशान कर रही थी। मैंने इसके बारे में कई प्रचारकों से पूछा था, लेकिन कभी भी सटीक उत्तर नहीं मिला। कुछ समय पहले तक, जब मैंने एक दोस्त से इसका जिक्र किया और उसने मेरे साथ शब्दों के दो अंश पढ़े और फॉलो किए, तो मुझे सच्चाई का यह पहलू समझ में आया। ये दो मार्ग कहते हैं, “अवतार भगवान को मसीह कहा जाता है, और मसीह परमेश्वर की आत्मा द्वारा दान किया गया मांस है। यह मांस किसी भी आदमी के विपरीत है जो मांस का है। यह अंतर इसलिए है क्योंकि मसीह मांस और रक्त का नहीं, बल्कि आत्मा का अवतार है। उसके पास एक सामान्य मानवता और पूर्ण दिव्यता है। उसकी दिव्यता किसी पुरुष के पास नहीं है। उसकी सामान्य मानवता उसके सभी सामान्य क्रियाकलापों को मांस में समाहित कर लेती है, जबकि उसकी दिव्यता ईश्वर के कार्य को वहन करती है। यह उसकी मानवता या दिव्यता हो, दोनों स्वर्गीय पिता की इच्छा को प्रस्तुत करते हैं। मसीह का पदार्थ आत्मा है, अर्थात् देवत्व है। इसलिए, उसका पदार्थ स्वयं ईश्वर का है ... "
“परमेश्वर मांस बन जाता है जिसे मसीह कहा जाता है, और इसलिए मसीह जो लोगों को सच्चाई दे सकता है उसे परमेश्वर कहा जाता है। इसके बारे में अत्यधिक कुछ नहीं है, क्योंकि उसके पास ईश्वर का पदार्थ है, और ईश्वर का स्वभाव, और उसके कार्य में ज्ञान है, जो मनुष्य द्वारा अप्राप्य है। ... क्राइस्ट केवल पृथ्वी पर भगवान की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि इसके बजाय, ईश्वर द्वारा ग्रहण किए गए विशेष मांस के रूप में वह बाहर काम करता है और मनुष्य के बीच अपने काम को पूरा करता है। यह मांस वह नहीं है जिसे केवल किसी भी आदमी द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है, बल्कि वह जो पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य को पर्याप्त रूप से सहन कर सकता है, और भगवान के स्वभाव को व्यक्त कर सकता है, और अच्छी तरह से भगवान का प्रतिनिधित्व करता है, और मनुष्य को जीवन प्रदान कर सकता है। "
यह पता चला है कि "मसीह" का अर्थ है भगवान का अवतार। हालाँकि वह अपनी उपस्थिति के मामले में सामान्य और सामान्य है, मसीह के पास ईश्वर का दिव्य होना है और वह ईश्वर की आत्मा का अवतार है। वे स्वयं भगवान हैं। कि प्रभु यीशु को मसीह कहा जा सकता है क्योंकि वह ईश्वर अवतार है। उनके पास न केवल सामान्य मानवता है, बल्कि उनमें देवत्व भी है - जो किसी भी व्यक्ति के पास नहीं है। प्रभु यीशु का शब्द और काम और उनके द्वारा बताए गए स्वभाव ईश्वर की दिव्यता की पूर्ण अभिव्यक्ति थे। उदाहरण के लिए, प्रभु यीशु का शब्द और कार्य प्राधिकरण और शक्ति से भरा है। जैसे ही उन्होंने बात की, उनके शब्द वास्तविकता बन गए, जैसे कि जब उन्होंने मृत को वापस जीवन में लाया, हवा और समुद्र को शांत किया, बीमारी को ठीक किया, आदमी के पापों को माफ कर दिया, और इसी तरह।
प्रभु यीशु ने युग की शुरुआत की, पश्चाताप का रास्ता लाया, स्वर्ग के राज्य के रहस्यों को प्रकट किया, और कई सच्चाइयों और एक स्वभाव को व्यक्त किया जो मुख्य रूप से दया और प्रेम था। सभी मानव जाति को भुनाने के लिए, उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया और परिणामस्वरूप, मनुष्य के पापों को क्षमा कर दिया गया। प्रभु यीशु का दिव्य पदार्थ किसी भी निर्मित होने के कारण नहीं है। हालाँकि हारून और उसके वंशज, शाऊल, दाऊद और सुलैमान अभिषिक्त जन थे, वे केवल परमेश्वर के प्राणी थे और वे लोग जो पवित्र आत्मा द्वारा उपयोग किए गए थे या जिन्होंने परमेश्वर की सेवा की थी। उनके पास देवत्व का थोड़ा भी निशान नहीं था और वे ईश्वर के अवतार नहीं थे। इसलिए, उन्हें मसीह नहीं कहा जा सकता था। हालाँकि मसीह की बाहरी उपस्थिति एक साधारण व्यक्ति के समान थी, लेकिन उनका सार किसी भी व्यक्ति से अलग है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर को अवतार के अलावा किसी को मसीह नहीं कहा जा सकता है। प्रभु के मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद, मेरे दोस्त की संगति सुनने के बाद, मेरी उलझन आखिरकार हल हो गई।
Online Hindi Bible Classes | Online Bible Study
April 01, 2020
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प्रभु येशु मसीह के पवित्र और जीवित नाम में आप सभी को जय मसीह की ! ऑनलाइन हिंदी बाइबिल क्लास में आप सब का सवागत है हम आशा करते है की प्रभु में आप आप सभी बहुत खुश और आनंदित है ! हमारा आज का टॉपिक है नए विद्यार्थियो के लिए जो प्रभु येशु मसीह और वचन के बारे में जानना चाहते है और सीखना चाहते है इस ऑनलाइन ट्रेनिंग में नए है ! और यह जानना चाहते है की में इस ऑनलाइन ट्रेनिंग को किस तरह से ले सकते है !
आज के समय
में बहुत से
मसीह लोग प्रभु
येशु मसीह, परमेशवर
और उनके सामर्थी
कामो को जानने
और सिखने की
इच्छा रखते है
! इसलिए बाइबल की शिक्षा
के लिए बहुत
से स्कूल और
विध्यालय बनाए गए
है ! जिस वजह
से बहुत से
मसीह लोगो को
प्रभु येशु मसीह
और उनके सामर्थी
कामो को बेहतर
और स्पष्ट तरीके
से जानने का
मौका मिला जोकि
मसीह समाज में
एक बहुत बड़ी
क्रांति के रूप
में आगे आयी
और सफल हुई
! लेकिन इस सफलता
का एक दूसरा
पहलु भी है
जो की बहुत
ही दुखदाई है
! कई मसीह ऐसे
भी है जो
प्रभु येशु को
जानना और समझने
की चाह रखते
है लेकिन कुछ
कारणों की वजह
से वह प्रभु
को अपना समय
नहीं दे पा
रहे !
लेकिन आज आप सभी के लिए एक खुशखबरी है ! प्यारे मसीह भाई बहनो अब बाइबल की शिक्षा किसी भी समय और किसी भी वक्त और जैसे आप चाहते है वैसे ले सकते है ! और यह निशुल्क है इसके कोई भी पैसे आप से नहीं लिए जाएंगे !
जैसे की !!!!
गरीबी की वजह
से !
नौकरी की वजह
से !
समय न होने
की वजह से
!
सलाहकार
न होने की
वजह से !
पारिवारिक
परेशानियों की वजह
से !
घर से सहमति
न मिलने की
वजह से !
सामाज के डर
की वजह से
!
छोटी सोच की
वजह से !
पति या पत्नी
की वजह से
!
इत्यादि जो की
आप बहुत ही
बेहतर तरीके से जानते
है !
लेकिन आज आप
सभी के लिए
एक खुशखबरी है ! प्यारे
मसीह भाई
बहनो अब बाइबल
की शिक्षा किसी
भी समय और
किसी भी वक्त
और जैसे आप
चाहते है वैसे
ले सकते है
! और यह निशुल्क
है इसके कोई
भी पैसे आप
से नहीं लिए
जाएंगे !
दूसरा सवाल हम
बाइबल की शिक्षा
किस प्रकार ले
सकते है ?
सबसे पहले हम
आप सबको यह
बताना चाहेंगे की
बाइबल की ट्रेनिंग
उसी प्रकार रहेगी
जैसे की हर
बाइबल स्कूल और
विद्यालय में होती
है ! समय की
कोई पाबन्दी नहीं
समय जो आपको
सही लगे उस
समय में आप
अपनी शिक्षा ले
सकते है !
यदि आप बाइबल
की शिक्षा को
लेना चाहते है
तो आपको नियमो
के अनुसार कार्य
करना होगा !
नंबर एक बाइबल अध्यन कक्षा में शामिल होने के लिए आपको बिलकुल नियम के अनुसार ही फॉर्म फरना होगा जैसे की आप स्कूल या विद्यालय में दाखिल होने क लिए करते है ! यह इस लिए जरुरी ताकि हमे जानकारी रहे की जो विद्यार्थी हमारे साथ जुड़ रहा है वह कौन है ? आपका नाम और आप कहा से है ? आप शिक्षा क्यों लेना चाहते है ? इत्यादि ..... फॉर्म भरने के लिए वेबसाइट का लिंक दिया गया है कृपया वेबसाइट का इस्तेमाल करके आप ऑनलाइन बाइबिल क्लास से जुड़ सकते है ! बाइबल ट्रेनिंग पूरी तरह निशुल्क है प्रभु के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए यह कार्य किया जा रहा है !
नंबर दो - आपके
पास बाइबल का
होना जरुरी है
यदि आपके पास
बाइबल नहीं है
तो आप इसे
दिए गए लिंक
से अपने फ़ोन
पर डाउनलोड कर
सकते है ! या
प्ले स्टोर से
पवित्र बाइबिल को डाउनलोड
कर सकते है
!
नंबर तीन वचनो को लिखने
के लिए कृपया एक नोटबुक या डायरी अपने साथ रखे जिसे आप सिर्फ बाइबिल अध्यन के लिए ही
इस्तेमाल करे ! ध्यान दे आपके दवारा किया गया कार्य हमारी टीम के दवारा चेक किया तो
आप सभी से निवेदन है की दिया गया कार्य पूरी ईमानदारी से करें ताकि प्रभु आपकी मेहनत
से खुश रहे !
नंबर चार बाइबल की
शिक्षा आपको सही तरिके से देने के लिए वीडियो का इस्तेमाल किया जाएगा जिसे आप ऑनलाइन
यूट्यूब के जरिए देख सकते है जो की आपको हफ्ते मैं तीन दिन यानि मंगलवार गुरुवार और
शनिवार को यूट्यूब पर मिलेगी इसलिए आपसे निवेदन है की ऑनलाइन हिंदी बाइबिल क्लास यूट्यूब
चैनल को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन बेल को ऑन कर दे ताकि आप को क्लास में दिए जाने
वाले कार्य की वीडियो की जानकारी तुरंत मिल सके !
नंबर पांच - क्लास
की वीडियो पूरी तरह देखने का बाद वीडियो के डिस्क्रिप्शन में आपको दिए गए अध्याय सम्बन्धी
प्रश्न दिए जाएंगे जिसे आपको बाइबल में से खोज कर अपनी डायरी या नोटस में लिखना होगा
! इसके साथ ही आपको एक वचन दिया जाएगा जिसे आपको याद करना है ! अब आपको अपना किया हुआ
कार्य संडे यानि रविवार से पहले हमारी टीम को भेजना है और जो वचन अपने याद किया है
उसकी रिकॉर्डिंग करके हमारी टीम को भेजना है ध्यान दे की रिकॉर्डिंग आपको बिना देखे
ही करनी है आपको इसे बाइबल से देख कर रिकॉर्ड नहीं करना है पहले आप वचन को याद करें
उसके बाद उसे रिकॉर्ड करें !
तीसरा सवाल आपके द्वारा
किया गया कार्य आप हमे कैसे भेज सकते है ?
आपके द्वारा किया गया
कार्य आप हमे
तीन तरीको से
भेज सकते है
पहला ईमेल के
जरिए दूसरा व्हाट्सप्प
के जरिए तीसरा
आप डिजिटल तरिके
से !
यानि की आपने
क्लास के दौरान
जो कार्य किया
उसकी फोटो क्लिक
करें या उसे
स्कैन करें उसके
बाद उस फोटो
को आप हमारी
ईमेल पर भेज
सकते है ईमेल
आपको वीडियो की
डिस्क्रिप्शन में मिल
जाएगी ! या आप
हमे व्हाट्सप्प पर
भेज सकते है
व्हाट्सअप पर भेजने
के लिए कृपया
वीडियो की डिस्क्रिप्शन
को चेक करें
या फिर आप
डिजिटल तरीके से अपने
नोट्स बना सकते
है जो की
आपको हमारी वेबसाइट
पर मिल जाएगी
जिसमे आप ऑनलाइन
टाइप करके अपना
उत्तर दे सकते
है !
ध्यान दे जब
आप एडमिशन फॉर्म
भरने के बाद
आप हमारे साथ
व्हाट्सअप ग्रुप के जरिए
जुड़ जाते है
यह इसलिए जरुरी
है ताकि क्लास
सम्बन्धी जानकारी आपको तुरंत
मिल सके लेकिन
ग्रुप के कुछ
नियम है कृपया
उसका पालन करें
!
ग्रुप केवल क्लास
के लिए इस्तेमाल
होगा तो कृपया
बिना एडमिन की
सहमति के इसमें
कोई भी पोस्ट
न भेजे या
फॉरवर्ड ना करें
चाहे वह कोई
वचन या प्रभु
येशु संबधी पोस्ट
ही क्यों ना
हो ग्रुप में
शेयर ना करें
केवल ग्रुप एडमिन
ही ग्रुप में
पोस्ट कर सकता
है ! यदि कोई
सवाल हो तो
आप ग्रुप का
इस्तेमाल कर सकते
है और टीम
ग्रुप मेंबर्स से
बातचीत कर सकते
है केवल बाइबल
सम्बन्धी या क्लास
के सम्बन्ध में
ही टॉपिक होना
चाहिए !
ग्रुप के किसी
भी मेंबर को
वयग्तिगत तौर पर
सन्देश ना भेजे
!
ग्रुप को रात
दस बजे बंद
कर दिया जाएगा
और सुबह सात
बजे ग्रुप को
एक्टिव कर दिया
जाएगा ! यदि कोई
महत्वपूर्वन बात हो
तो ग्रुप एडमिन
को सन्देश भेज
सकते है !
ग्रुप एडमिन का नंबर सेव कर लें ! पास्टर सूरज चौहान !
हम आशा करते
है आजका यह टॉपिक बाइबल
क्लास को समझने
में आप सभी
की मदद कर
सके यदि आप
चाहते है की
और भी लोग
बाइबल क्लास से
शिक्षा को ले
सके तो कृपया
इस उसे भेजे जो
बाइबल की ट्रेनिंग
लेना चाहता है
!
अपना महत्वपूर्ण समय देने
के लिए धन्यवाद्
प्रभु आप सब
को आशीष दे
! जय मसीह की
!
अब घर बैठे ही ले सकते है बाइबिल अधयन्न का लाभ | Online Bible Classes
April 01, 2020
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प्रभु येशु मसीह के पवित्र और जीवित नाम में आप सभी को जय मसीह की ! ऑनलाइन हिंदी बाइबिल क्लास में आप सब का सवागत है हम आशा करते है की प्रभु में आप आप सभी बहुत खुश और आनंदित है ! हमारा आज का टॉपिक है नए विद्यार्थियो के लिए जो प्रभु येशु मसीह और वचन के बारे में जानना चाहते है और सीखना चाहते है इस ऑनलाइन ट्रेनिंग में नए है ! और यह जानना चाहते है की में इस ऑनलाइन ट्रेनिंग को किस तरह से ले सकते है !
आज के समय
में बहुत से
मसीह लोग प्रभु
येशु मसीह, परमेशवर
और उनके सामर्थी
कामो को जानने
और सिखने की
इच्छा रखते है
! इसलिए बाइबल की शिक्षा
के लिए बहुत
से स्कूल और
विध्यालय बनाए गए
है ! जिस वजह
से बहुत से
मसीह लोगो को
प्रभु येशु मसीह
और उनके सामर्थी
कामो को बेहतर
और स्पष्ट तरीके
से जानने का
मौका मिला जोकि
मसीह समाज में
एक बहुत बड़ी
क्रांति के रूप
में आगे आयी
और सफल हुई
! लेकिन इस सफलता
का एक दूसरा
पहलु भी है
जो की बहुत
ही दुखदाई है
! कई मसीह ऐसे
भी है जो
प्रभु येशु को
जानना और समझने
की चाह रखते
है लेकिन कुछ
कारणों की वजह
से वह प्रभु
को अपना समय
नहीं दे पा
रहे !
लेकिन आज आप सभी के लिए एक खुशखबरी है ! प्यारे मसीह भाई बहनो अब बाइबल की शिक्षा किसी भी समय और किसी भी वक्त और जैसे आप चाहते है वैसे ले सकते है ! और यह निशुल्क है इसके कोई भी पैसे आप से नहीं लिए जाएंगे !
जैसे की !!!!
गरीबी की वजह
से !
नौकरी की वजह
से !
समय न होने
की वजह से
!
सलाहकार
न होने की
वजह से !
पारिवारिक
परेशानियों की वजह
से !
घर से सहमति
न मिलने की
वजह से !
सामाज के डर
की वजह से
!
छोटी सोच की
वजह से !
पति या पत्नी
की वजह से
!
इत्यादि जो की
आप बहुत ही
बेहतर तरीके से जानते
है !
लेकिन आज आप
सभी के लिए
एक खुशखबरी है ! प्यारे
मसीह भाई
बहनो अब बाइबल
की शिक्षा किसी
भी समय और
किसी भी वक्त
और जैसे आप
चाहते है वैसे
ले सकते है
! और यह निशुल्क
है इसके कोई
भी पैसे आप
से नहीं लिए
जाएंगे !
दूसरा सवाल हम
बाइबल की शिक्षा
किस प्रकार ले
सकते है ?
सबसे पहले हम
आप सबको यह
बताना चाहेंगे की
बाइबल की ट्रेनिंग
उसी प्रकार रहेगी
जैसे की हर
बाइबल स्कूल और
विद्यालय में होती
है ! समय की
कोई पाबन्दी नहीं
समय जो आपको
सही लगे उस
समय में आप
अपनी शिक्षा ले
सकते है !
यदि आप बाइबल
की शिक्षा को
लेना चाहते है
तो आपको नियमो
के अनुसार कार्य
करना होगा !
नंबर एक बाइबल अध्यन कक्षा में शामिल होने के लिए आपको बिलकुल नियम के अनुसार ही फॉर्म फरना होगा जैसे की आप स्कूल या विद्यालय में दाखिल होने क लिए करते है ! यह इस लिए जरुरी ताकि हमे जानकारी रहे की जो विद्यार्थी हमारे साथ जुड़ रहा है वह कौन है ? आपका नाम और आप कहा से है ? आप शिक्षा क्यों लेना चाहते है ? इत्यादि ..... फॉर्म भरने के लिए वेबसाइट का लिंक दिया गया है कृपया वेबसाइट का इस्तेमाल करके आप ऑनलाइन बाइबिल क्लास से जुड़ सकते है ! बाइबल ट्रेनिंग पूरी तरह निशुल्क है प्रभु के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए यह कार्य किया जा रहा है !
नंबर दो - आपके
पास बाइबल का
होना जरुरी है
यदि आपके पास
बाइबल नहीं है
तो आप इसे
दिए गए लिंक
से अपने फ़ोन
पर डाउनलोड कर
सकते है ! या
प्ले स्टोर से
पवित्र बाइबिल को डाउनलोड
कर सकते है
!
नंबर तीन वचनो को लिखने
के लिए कृपया एक नोटबुक या डायरी अपने साथ रखे जिसे आप सिर्फ बाइबिल अध्यन के लिए ही
इस्तेमाल करे ! ध्यान दे आपके दवारा किया गया कार्य हमारी टीम के दवारा चेक किया तो
आप सभी से निवेदन है की दिया गया कार्य पूरी ईमानदारी से करें ताकि प्रभु आपकी मेहनत
से खुश रहे !
नंबर चार बाइबल की
शिक्षा आपको सही तरिके से देने के लिए वीडियो का इस्तेमाल किया जाएगा जिसे आप ऑनलाइन
यूट्यूब के जरिए देख सकते है जो की आपको हफ्ते मैं तीन दिन यानि मंगलवार गुरुवार और
शनिवार को यूट्यूब पर मिलेगी इसलिए आपसे निवेदन है की ऑनलाइन हिंदी बाइबिल क्लास यूट्यूब
चैनल को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन बेल को ऑन कर दे ताकि आप को क्लास में दिए जाने
वाले कार्य की वीडियो की जानकारी तुरंत मिल सके !
नंबर पांच - क्लास
की वीडियो पूरी तरह देखने का बाद वीडियो के डिस्क्रिप्शन में आपको दिए गए अध्याय सम्बन्धी
प्रश्न दिए जाएंगे जिसे आपको बाइबल में से खोज कर अपनी डायरी या नोटस में लिखना होगा
! इसके साथ ही आपको एक वचन दिया जाएगा जिसे आपको याद करना है ! अब आपको अपना किया हुआ
कार्य संडे यानि रविवार से पहले हमारी टीम को भेजना है और जो वचन अपने याद किया है
उसकी रिकॉर्डिंग करके हमारी टीम को भेजना है ध्यान दे की रिकॉर्डिंग आपको बिना देखे
ही करनी है आपको इसे बाइबल से देख कर रिकॉर्ड नहीं करना है पहले आप वचन को याद करें
उसके बाद उसे रिकॉर्ड करें !
तीसरा सवाल आपके द्वारा
किया गया कार्य आप हमे कैसे भेज सकते है ?
आपके द्वारा किया गया
कार्य आप हमे
तीन तरीको से
भेज सकते है
पहला ईमेल के
जरिए दूसरा व्हाट्सप्प
के जरिए तीसरा
आप डिजिटल तरिके
से !
यानि की आपने
क्लास के दौरान
जो कार्य किया
उसकी फोटो क्लिक
करें या उसे
स्कैन करें उसके
बाद उस फोटो
को आप हमारी
ईमेल पर भेज
सकते है ईमेल
आपको वीडियो की
डिस्क्रिप्शन में मिल
जाएगी ! या आप
हमे व्हाट्सप्प पर
भेज सकते है
व्हाट्सअप पर भेजने
के लिए कृपया
वीडियो की डिस्क्रिप्शन
को चेक करें
या फिर आप
डिजिटल तरीके से अपने
नोट्स बना सकते
है जो की
आपको हमारी वेबसाइट
पर मिल जाएगी
जिसमे आप ऑनलाइन
टाइप करके अपना
उत्तर दे सकते
है !
ध्यान दे जब
आप एडमिशन फॉर्म
भरने के बाद
आप हमारे साथ
व्हाट्सअप ग्रुप के जरिए
जुड़ जाते है
यह इसलिए जरुरी
है ताकि क्लास
सम्बन्धी जानकारी आपको तुरंत
मिल सके लेकिन
ग्रुप के कुछ
नियम है कृपया
उसका पालन करें
!
ग्रुप केवल क्लास
के लिए इस्तेमाल
होगा तो कृपया
बिना एडमिन की
सहमति के इसमें
कोई भी पोस्ट
न भेजे या
फॉरवर्ड ना करें
चाहे वह कोई
वचन या प्रभु
येशु संबधी पोस्ट
ही क्यों ना
हो ग्रुप में
शेयर ना करें
केवल ग्रुप एडमिन
ही ग्रुप में
पोस्ट कर सकता
है ! यदि कोई
सवाल हो तो
आप ग्रुप का
इस्तेमाल कर सकते
है और टीम
ग्रुप मेंबर्स से
बातचीत कर सकते
है केवल बाइबल
सम्बन्धी या क्लास
के सम्बन्ध में
ही टॉपिक होना
चाहिए !
ग्रुप के किसी
भी मेंबर को
वयग्तिगत तौर पर
सन्देश ना भेजे
!
ग्रुप को रात
दस बजे बंद
कर दिया जाएगा
और सुबह सात
बजे ग्रुप को
एक्टिव कर दिया
जाएगा ! यदि कोई
महत्वपूर्वन बात हो
तो ग्रुप एडमिन
को सन्देश भेज
सकते है !
ग्रुप एडमिन का नंबर सेव कर लें ! पास्टर सूरज चौहान !
हम आशा करते
है आजका यह टॉपिक बाइबल
क्लास को समझने
में आप सभी
की मदद कर
सके यदि आप
चाहते है की
और भी लोग
बाइबल क्लास से
शिक्षा को ले
सके तो कृपया
इस उसे भेजे जो
बाइबल की ट्रेनिंग
लेना चाहता है
!
अपना महत्वपूर्ण समय देने
के लिए धन्यवाद्
प्रभु आप सब
को आशीष दे
! जय मसीह की
!




















